Home » बिहार में जमीन सर्वे पर फिर बदला नीतीश सरकार का स्टैंड, अब नया कानून बनेगा, कैबिनेट की अगली बैठक में पास होगा
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पटना बिहार में जमीन सर्वे कराने के फैसले से करोड़ो लोगों को भारी परेशानी में डाल चुकी नीतीश सरकार ने फिर स्टैंड बदला है. अब जमीन सर्वे के तौर-तरीके में सुधार के लिए नया कानून बनाया जायेगा. कैबिनेट की अगली बैठक में सरकार नये सिरे से जमीन सर्वे के नियम-कानून पर चर्चा कर उसे पास करेगी.
फंस गयी है सरकार
दरअसल, जमीन सर्वे कराने का फैसला नीतीश सरकार के लिए गले की हड्डी बन गया है. अधिकारियों के भरोसे चल रही सरकार ने जमीन सर्वे के लिए ऐसे नियम-कायदे बनाये हैं बिहार के करोड़ों लोग मुसीबत में पड़ गये हैं. सरकार दो पीढ़ियों का वंशावली बनाने को कह रही है. इसके लिए ऐसे नियम-शर्त रखे गये हैं कि वंशावली तैयार कर पाना नामुमकिन काम हो गया है. जमीन सर्वे के दूसरे प्रावधानों से भी लोग काफी परेशान हैं.
अब नया कानून बनेगा
जमीन सर्वे को लेकर लोगों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए नीतीश सरकार ने सर्वे पर तत्काल रोक लगाने का फैसला लिया था. वहीं, सर्वे का टाइम भी बढ़ा दिया था. लेकिन अब नये सिरे से कानून बनाकर उसी मुताबिक जमीन सर्वे कराने का फैसला लिया गया है. सरकार कह रही है कि इस बार ऐसा कानून बनाने जा रही है जिससे लोगों को परेशानी नहीं होगी.
अगली कैबिनेट में पास होगा नया कानून बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने आज इसकी जानकारी दी. दिलीप जायसवाल ने भागलपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जमीन सर्वे की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य सरकार नया कानून लाने वाली है. मंत्री दिलीप जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मौजूदा भूमि सर्वे को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हैं, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके कारण ही सरकार ने सर्वे पर रोक लगाते हुए इसकी अवधि बढ़ाई थी.मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार सरकार कैबिनेट की अगली बैठक में जमीन सर्वे से संबंधित नया कानून बनाने का एक प्रस्ताव ला रही है. इस कानून से लोगों को अपनी भूमि के सर्वे कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. सरकार लोगों की सारी परेशानी और समस्याओं को दूर कर देगी.
मंत्री ने कहा कि जमीन विवाद को कम करने के लिए राज्य के सभी राजस्व अधिकारियों को सीधे तौर पर हिदायत दी गई है कि वे लंबित मामलों का निपटारा न्याय के साथ निर्धारित अवधि के भीतर करें. इसके लिए एक महीने का समय दिया गया है. अधिकारियों को कहा गया है कि वे जल्दबाजी में किसी मामले को रद्द नहीं करें. जिस अंचल के भूमि विवाद के मामले ज्यादा समय तक लंबित रहेंगे, वहां के राजस्व पदाधिकारी दंडित किए जाएंगे. मंत्री ने दावा किया कि भूमि विवाद की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है.

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